मेरा नाम अक्षय है,,और आप सब की तरह मै भी कवि बनना चाहता हूँ और आप सब की कविताएँ पढ़ाना चाहता हूँ।
मुझे एक कविता बेहद पसंद है,जो मेरी माँ मुझे सुनाती है...जिसने मुझे लिखने की प्रेरणा दी है...उसकी कुछ पक्तिंयाँ इस प्रकार से है...
लहरो से डर कर नौका पार नही होती,
कोशिश करने वालो की हार नही होती।
अक्षय....



10 comments:
चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है अक्षय। जानकर खुशी हुई कि आप अपनी माता जी से प्रेरणा पाकर चिट्ठाजगत में आए। उम्मीद है आप भी उनकी तरह रोचक शैली में लेखन करेंग।
शिरिष.
बहुत खुशी हुई जान कि तुम कवितायें लिखते हो। जब प्रेरणा घर में ही हो तो तुममे स्वाभाविक प्रतिभा होगी ही।
*** राजीव रंजन प्रसाद
बहुत खूब लिखते रहो। खूब लिखो!
Dear Akshay:
ye jaan kar ki kavita likhane me aapki bhi ruchi hai bahut khushi huyee... aap kavita likhane me apni maa se bhi aage nikale aisi shubhkamanaaye hai...
Akash-USA
आप तो वो बनना चाहते हैं जो आप पहले से हैं। आप एक महान कवि हैं। बनना कुछ नहीं होता है, जो मन में आए, उसे लिखिए, कवि बन जायेंगे।
badhiya likha hai
हाँ तुम्हारी सफलता सुनिश्चित है, क्योंकि तुम्हे अपनी क्षमता पर पूरा भरोसा है।
Very Happy to hear that beta...keep it up...im sure one day you will become a big poet.
सुन्दर ! .. लिखते रहो !
उत्साह, कोशिश और धैय, सफलता की तीन सीढियाँ हैं। आप पूरे मन से इन पर चढते रहें, सफलता जरूर मिलेगी।
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