Saturday, 9 June, 2007

मेरा परिचय
















मेरा नाम अक्षय है,,और आप सब की तरह मै भी कवि बनना चाहता हूँ और आप सब की कविताएँ पढ़ाना चाहता हूँ।

मुझे एक कविता बेहद पसंद है,जो मेरी माँ मुझे सुनाती है...जिसने मुझे लिखने की प्रेरणा दी है...उसकी कुछ पक्तिंयाँ इस प्रकार से है...

लहरो से डर कर नौका पार नही होती,
कोशिश करने वालो की हार नही होती।

अक्षय....

10 comments:

Shrish said...

चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है अक्षय। जानकर खुशी हुई कि आप अपनी माता जी से प्रेरणा पाकर चिट्ठाजगत में आए। उम्मीद है आप भी उनकी तरह रोचक शैली में लेखन करेंग।

राजीव रंजन प्रसाद said...

शिरिष.
बहुत खुशी हुई जान कि तुम कवितायें लिखते हो। जब प्रेरणा घर में ही हो तो तुममे स्वाभाविक प्रतिभा होगी ही।

*** राजीव रंजन प्रसाद

अनूप शुक्ला said...

बहुत खूब लिखते रहो। खूब लिखो!

Akash-USA said...

Dear Akshay:

ye jaan kar ki kavita likhane me aapki bhi ruchi hai bahut khushi huyee... aap kavita likhane me apni maa se bhi aage nikale aisi shubhkamanaaye hai...

Akash-USA

शैलेश भारतवासी said...

आप तो वो बनना चाहते हैं जो आप पहले से हैं। आप एक महान कवि हैं। बनना कुछ नहीं होता है, जो मन में आए, उसे लिखिए, कवि बन जायेंगे।

Anonymous said...

badhiya likha hai

अनुनाद सिंह said...

हाँ तुम्हारी सफलता सुनिश्चित है, क्योंकि तुम्हे अपनी क्षमता पर पूरा भरोसा है।

Anupama Chauhan said...

Very Happy to hear that beta...keep it up...im sure one day you will become a big poet.

रिपुदमन पचौरी said...

सुन्दर ! .. लिखते रहो !

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

उत्साह, कोशिश और धैय, सफलता की तीन सीढियाँ हैं। आप पूरे मन से इन पर चढते रहें, सफलता जरूर मिलेगी।